महाराष्ट्र का अब सभी ने हाल ही में आर रही सीमा। बंटवारे से जुड़ी खबरें तो सुनी ही होंगी। कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच सीमा विवाद को सुलझाना बिल्कुल भी आसान नहीं है। फिलहाल ये मामला सुप्रीम कोर्ट में है। इसके बावजूद कई तकनीकी मसले ने अभी भी इस मामले को उलझा कर रखा हुआ है। उधर, केंद्र ने इससे खुद को पूरी तरह से अलग कर लिया है, जिससे मुद्दा और भी उलझ गया है। अमित शाह और महाराष्ट्र गृह मंत्री अमित शाह के इंस्ट्रक्शन के बावजूद कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच सीमा विवाद जारी है।
महाराष्ट्र विधानसभा में प्रस्ताव पेश करते हुए राज्य के सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा था कि कर्नाटक से अपनी एक एक इंच जमीन वापस लेंगे और इधर कर्नाटका के सीएम बसवराज बोम्मई ने भी जवाबी हमला किया था और कहा कि वो एक इंच भी जमीन नहीं देंगे। दोनों राज्यों के बीच करीब एक महीने से सीमा को लेकर बहस और विवाद जारी है। बता दें कि वैसे ये विवाद 1957 से कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच चल रहा है। देश में कर्नाटक और महाराष्ट्र के अलावा भी कई ऐसे राज्य हैं जहां सीमा को लेकर विवाद है। भारत की आजादी को 75 साल से ज्यादा होने वाले लेकिन इसके बाद भी कई राज्यों के बीच सीमा का बंटवारा हुआ था।
इसका प्राइम एग्जाम्पल दो हज़ार 19 में देखने को मिला था, जब जम्मू और कश्मीर से अलग कर लद्दाख को अलग कर दिया गया और इसी के साथ आज हम इस बात को जानते हैं कि राज्यों के बीच सीमा बंटवारा कैसे किया जाता है। तो चलिए अब बिना वक्त गंवाए अब हम इस बारे में पूरी तरह से जानते हैं। सबसे पहले तो आपको बता दें कि राज्यों के विभाजन फॉर्मूला के लिए तीन कमेटी बननी थी, लेकिन वो सब फेल हुई थी। 1948 में बने एसके धर समिति ने कहा था कि राज्यों का बंटवारा प्रशासनिक आधार पर किया जाए।
इस कमेटी का गठन संविधान सभा के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद ने किया था। पर इस समिति की रिपोर्ट को अधिकारी मान्यता नहीं दी गई। कॉंग्रेस के जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल और पट्टाभि सीतारमैया यानी जेवीपी समिति ने कहा था कि भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन नहीं किया जाए। आन्ध्र में इसका काफी बड़े स्केल पर विरोध हुआ था, जबकि महाराष्ट्र में कई जगहों पर लोगों के बीच हिंसा तक बाद भी पहुंच गई थी। इसके बाद 1953 में फजल अली की लीडरशिप में राज्य पुनर्गठन आयोग बनाया गया था। इस आयोग ने अपनी सिफारिश में कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा, फाइनेन्शियल और एडमिनिस्ट्रेटिव नीड और पांच साल प्लान की सफलता को ध्यान में रखते हुए राज्य बनाए जाएं। फिर कैसे होता है राज्यों के बीच सीमा बंटवारा। इन सभी बातों को जानने के बाद अब सवाल ये उठता है कि इतना सब होने के बावजूद आखिर हमारे देश में सीमा का बंटवारा कैसे हुआ। तो उसका जवाब है कि इसका कोई तय फॉर्मूला नहीं है, लेकिन अब तक चार आधार पर ही सीमा का बंटवारा होता आया है।
इसमें सबसे पहले आता है ज्योग्राफिकल प्रॉक्सिमिटी इन फैक्टर के बेसिस पर राज्यों के बीच सीमा का बंटवारा किया जाता है। केंद्र तय करता है कि दोनों राज्यों के बीच की भौगोलिक निकटता कैसी है। जैसे कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ और बिहार झारखंड के बीच भौगोलिक निकटता के आधार पर सीमा का बंटवारा किया गया है। अब दूसरा फैक्टर के बारे में बात करें तो वो है भाषाई आधार पर। साल 1953 में पी श्रीरामुलू ने अलग तेलुगू राज्य की मांग को लेकर जब तक मौत नहीं हो जाती तब तक अनशन पर बैठने का फैसला किया। 56 दिनों तक चले अनशन के बाद श्रीरामुलू की मौत हो गई। जिसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने आन्ध्र को अलग राज्य बनाने की घोषणा कर दी। भाषाई आधार पर इसके बाद महाराष्ट्र, गुजरात और हरियाणा पंजाब का बंटवारा किया गया। मद्रास प्रेजिडेंसी से अलग होकर आंध्र नया राज्य बना। तो इस हिसाब से देखें तो सीमा का बंटवारा भाषा के आधार पर हुआ था। अब आखिरी फैक्टर के बारे में बात करें तो वो है लोगों की इच्छा के आधार पर। राज्यों के बीच सीमा बंटवारे का सबसे महत्वपूर्ण तत्व लोगों की इच्छा है। हाल ही में लद्दाख और तेलंगाना का बंटवारा इसी आधार पर किया गया था।
लोगों की मांग को देखते हुए केंद्र सरकार किसी भी राज्य की सीमा का बंटवारा कर सकती है। इतना सब जानने के बाद आपके दिमाग में एक सवाल आ चुका होगा कि स्वतंत्रता से पहले हमारा देश कैसा था। तो इसका जवाब ये है कि आजादी से पहले हमारा देश 565 राजसी रियासतों में बंटा हुआ था। तब भारत में तीन प्रकार के राज्य थे। ब्रिटिश इण्डिया गणराज्य दूसरी रियासतें और अंत में फ्रांस का उपनिवेश। आजादी के बाद 562 रियासतें भारत के अंतर्गत आई, जिन्हें भारतीय संघ के राज्य के रूप में शून्य। गया। हालांकि उस समय हैदराबाद, जूनागढ़, भोपाल और कश्मीर भारत का हिस्सा बनने के लिए राजी नहीं हुए थे। 1956 तक ये रियासतें भी भारतीय संघ का हिस्सा बन गई थी और देश में 14 राज्य छह केन्द्र शासित प्रदेश बनाए गए। आजादी के बाद भारत के नक्शे पर उत्तर प्रदेश, कर्नाटका, गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों का नाम नहीं था और इनकी जगह सेंट्रल प्रोविंस, युनाईटेड प्रोविंस, बॉम्बे प्रोविंस, सेंट्रल इन इंडिया मद्रास प्रेसिडेंसी स्टेट हुआ करते थे। आजादी के बाद सालों में 17 राज्य बढ़ कर 29 हो गए। तो चलिए इसी के साथ हम आपको बता देते हैं कि कौन सा राज्य कब गठित हुआ। सबसे पहले जम्मू और कश्मीर के बारे में बात करते हैं। जम्मू कश्मीर के राजा हरि सिंह ने भारत में विलय के कागजातों पर हस्ताक्षर किए।
साल 1956 में इसे भारतीय संघ का हिस्सा घोषित कर दिया गया। अगस्त 2 हज़ार 19 में जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर दिया गया और ऐसा करके इसे केंद्र शासित प्रदेश में पूरी तरह से बदल दिया गया। अब अगला राज्य है उत्तर प्रदेश। तो इस राज्य को राजनीतिक रूप से देश का सबसे महत्वपूर्ण राज्य माना जाता है। उत्तर प्रदेश बनने से पहले इसे यूनाइटेड प्रोविंस के नाम से जाना जाता था, जिसमें अवध और आगरा भी शामिल थे। साल 1950 में भारत का हिस्सा बना था। इसके बाद आता है बिहार। 22 मार्च 1912 को इस राज्य को अंग्रेजों ने बनाया था। 26 जनवरी 1950 को इसे पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया था। साल दो हज़ार में बिहार से विभाजित होकर झारखंड नाम का एक नया राज्य बनाया गया। अब अगले राज्य के बारे में बात करें तो वो है असम। अंग्रेजों ने 1826 में असम को अपने अधिकार में लिया था। 1874 में बंगाल से विभाजित किया गया। 1912 में इसे रिकॉर्ड किया गया। मेघालय, नगालैंड और मिजोरम भी इसमें शामिल थे। इसके बाद आधा ओडीसा 1 अप्रैल 1936 को अंग्रेजों ने उड़ीसा को एक अलग राज्य घोषित कर दिया। 1950 में ये भारतीय राज्य बना और दो हज़ार 11 में इसका नाम बदलकर ओडीशा किया गया था। अब हमारे देश की सिख कम्युनिटी वाले राज्य के बारे में बात करें तो पटियाला रियासत में आठ छोटी छोटी रियासतों को साथ मिलाकर पंजाब का गठन किया गया था। 1966 में पंजाब से हरियाणा को अलग कर दिया गया और चंडीगढ़ को दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी बनाया गया। फिर आता हिमाचल प्रदेश।
साल 1950 में 30 रियासतों को मिलाकर हिमाचल प्रदेश बनाया गया था। 1956 में इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया और 25 जनवरी 1971 को इसे पूर्ण राज्य बनाया गया। अब मणिपुर के बारे में बात करें तो 1947 में मणिपुर को भी स्वतंत्रता प्राप्त हुई थी। 1956 में केंद्र शासित प्रदेश बना था और 21 जनवरी 1972 को इसे पूर्ण राज्य का दर्जा मिला। अब इसी के साथ हम आगे बढ़ें तो इन सभी राज्यों के बाद आता है। त्रिपुरा ये राज्य तीन ओर से बांग्लादेश से घिरा हुआ है। 1972 तक ये शासित राज्य था, लेकिन उसके बाद इसे पूर्ण राज्य बनाया गया। त्रिपुरा के पास के सिक्किम राज्य को देखें तो ये हमारे देश का दूसरा सबसे छोटा राज्य है। 16 मई 1975 को ये भारतीय संगठित कर बना था। अब छोटे राज्यों के बारे में बात हो रही है तो हम आपको गोवा के बारे में भी बता देते हैं। भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद भी ये क्षेत्र पार्टी के कंट्रोल में था। 1961 में भारतीय सेना ने इसे मुक्त कराया और इसे केंद्र शासित क्षेत्र बनाया गया। इसी के साथ दमन और दीव भी स्वतंत्र करा लिए गए। 30 मई 1987 को गोवा को पूर्ण राज्य घोषित कर दिया गया।
अरुणाचल प्रदेश 1972 में अरुणाचल प्रदेश को शासित प्रदेश बनाया गया था। 1987 में इसे पूर्ण राज्य बनाया गया और इटानगर को इसकी राजधानी घोषित कर दिया गया। अब छोटे राज्यों से हटकर बड़े राज्यों को देखें तो 1 नवंबर 2 हज़ार को मध्यप्रदेश का पुनर्गठन किया गया और उसमें छत्तीसगढ़ को अलग राज्य बनाया गया। इसी के साथ आदिवासी का घर समझे जाने वाले झारखंड 15 नवंबर 2 हज़ार को बिहार से अलग करके एक नया राज्य बना था। इसी के साथ आपको बता दें उत्तराखंड उत्तरी उत्तर प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों को मिलाकर यह राज्य बनाया गया था। नॉर्थ से आगे बढ़कर अब हम साउथ के राज्यों के बारे में बात करते हैं। तमिलनाडु को ब्रिटिश शासनकाल के दौरान मद्रास प्रेसिडेंसी कहा जाता था। 1950 में भारतीय प्रान्त बना और 1969 में इसका नाम तमिलनाडु किया गया। प्रदेश 1 नवंबर 1956 को इसे पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया था। इससे पहले ये मद्रास का हिस्सा था। 2 जून 2 हज़ार 14 को आन्ध्र प्रदेश के उत्तर पश्चिमी हिस्से को अलग राज्य तेलंगाना नाम दिया गया। इसके बाद मध्यप्रदेश, ग्वालियर, इन्दौर और भोपाल रियासत को मिला कर मध्यप्रदेश को बनाया गया था। सन 2 हज़ार में इसे विभाजित छत्तीसगढ़ को अलग राज्य बनाया गया। अब अगले राज्य के बारे में बात करें तो वो है केरल, त्रावणकोर, कोचीन और मलाबार। मिलाकर 1956 में केरल राज्य का गठन किया गया। अब कर्नाटक के बारे में बात करें तो 1 नवंबर 1956 को मैसूर राज्य का गठन किया गया था। 1973 में राज्य का नाम बदलकर कर्नाटका कर दिया गया। अब जिस राज्य के बारे में हम बात करने जा रहे हैं, वह है हमारे पीएम के दिल के सबसे करीब। महाराष्ट्र और गुजरात बॉम्बे प्रेसीडेंसी का हिस्सा थे। 1 मई 1960 को महाराष्ट्र और गुजरात को अलग कर के दो अलग अलग राज्य बना दिए गए। अब आखिर में आता तेलंगाना देश का 29वें राज्य था। आन्ध्र प्रदेश के कुछ जिलों को मिलाकर एक अलग राज्य तेलंगाना का गठन किया गया था। 2 जून 2 हज़ार 14 को ये पूर्ण राज्य घोषित हुआ था। तो ये थी हमारे देश के टुकड़ों की कहानी।