समंदर का सिकंदर...INS विक्रांत का शक्ति-प्रदर्शन


 अब हम आपको भारतीय नौसेना की ताकत और स्वदेशी एयरक्राफ्ट करियर आईएनएस विक्रांत के डेक पर लेकर चलते हैं जिसपर सोमवार को संयुक्त कमांडर्स कॉन्फ्रेंस हुई। ये कॉन्फ्रेंस पहली बार गोवा से लगे समुद्र में आईएनएस विक्रांत पर हुई और पीछे इसे पिछले साल ही नेवी में शामिल किया गया था। 

इसमें तीनों सेनाओं के चीफ सहित टॉप कमांडर्स के अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी शिरकत की। लेकिन किस तरीके से पढ़ाई की क्योंकि कोई शोध करने के अपनी उत्तराधिकारी पहले। मुझे अनुमान नहीं था कि मैं अच्छा राष्ट्रपति बनने के बाद के नजदीक आकर मुझे देखने का अवसर प्राप्त हुआ और धीरे धीरे अब मैं आश्वस्त हूं कि बड़ी बड़ी बड़ी से बड़ी शक्तियों का मुकाबला करने के लिए हमारी हमारी जनता की शक्तियों को सुनिश्चित करने के लिए हमारी एनर्जी पूरी तरह से तैयार। और जब तक किसी राशि सुरक्षित ना हो। तब तक कुछ राष्ट्र की आर्थिक प्रगति यानी इस्लामिक कट्टरपंथ के बारे में तो कल्पना की जा सकती। 

अपराधी शापग्रस्त हैं। चाहे कितनी भी प्रतिकूल परिस्थितियां क्यों हों, उसका मुकाबला करने के लिए हमारे देश के आर्मी नेवी एयरफोर्स के जवान पूरी तरह से तैयार। स्वदेशी आईएनएस विक्रांत पर सिर्फ संयुक्त कमांडर्स कॉन्फ्रेंस ही नहीं हुई बल्कि इस वॉरशिप पर मॉक ड्रिल भी हुई। जिसमें फाइटर जेट्स से लेकर हेलीकॉप्टर्स और पनडुब्बी से लेकर वॉरशिप तक सबने अपनी अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। जी मीडिया समूह का किया मिश्रा ने आईएनएस विक्रांत के ग्राउंड के इस शक्ति प्रदर्शन को कैमरे में रिकॉर्ड किया जिसके हाईलाइट्स अब हम आपको दिखा रहे हैं। इसमें भारतीय नौसेना की छह शिप, छह जंगी जहाज एंटी सबमरीन वारफेयर यानी दुश्मन की पनडुब्बी को तबाह करने की अपनी ताकत दिखा रहे हैं।

इसमें छह जहाज जिनमें से तीन तीन क्लास के फ्रिगेट हैं और तीन एंटी सबमरीन वारफेयर के शिप हैं। वो इसमें दुश्मन की सबमरीन पर एंटी सबमरीन रॉकेट्स फायर कर रहे हैं। यानी एस डब्ल्यू रॉकेट फायर करते दुश्मन की समरीन। अगर आपके समंदर में आपके इलाके में हैं तो उससे उतना ही खौफ पैदा होता है जितना आपके घर के पीछे किसी तेंदुए या टाइगर के आने पर होता। दुश्मन की सबमरीन अदृश्य रहती है और वो किसी भी जहाज के लिए सबसे बड़ा खतरा होती है। और एयरक्राफ्ट कैरियर जैसे कीमती और बड़े जहाज के लिए तो ये खतरा और भी बढ़ जाता है। 

इसलिए जब भी कोई एयरक्राफ्ट कैरियर चलता है तो उसके साथ जंगी जहाजों का एक बेड़ा चलता है जिसमें डेस्ट्रॉयर सोते हैं जिनमें फ्रिगेट होते हैं जिसमें से मरीन वॉरफेयर होते हैं और जिनके साथ सबमरीन होती है। इस समय इस एक्सरसाइज में इस ऑपरेशन में 20 के लगभग भारतीय नौसेना के जंगी जहाज और सबमरीन हिस्सा ले रहे हैं। छह जहाज सामने खड़े हुए हैं और वो एंटी सबमरीन वारफेयर का प्रदर्शन कर रहे हैं। यानी दुश्मन की सबमरीन पर एंटी सबमरीन रॉकेट्स फायर करने उसके बाद वो गन से सबमरीन को समझ इनपर हमला करेंगे। दुश्मन की सवारी जब समुद्र के अंदर होती है तो उसको सबसे पहले एक डेप्थ चार यानी बहुत बड़ी मात्रा में विस्फोटक डाल कर पानी को एक तरीके से गर्म कर दिया था। उबाल दिया जाता खेल बना दिया जाता जिसे सबमरीन की ऊपरी जो कवर है वो टूट जाता और समरीन को मजबूरी में ऊपर आना पड़ता है और उसी समय एंटी सबमरीन वॉरफेयर के रॉकेट्स जो कि हेलीकॉप्टर से ही पार किया सकते हैं और जंगी जहाजों से भी वो एक्शन में आते हैं और दुश्मन की समरीन को तबाह करते हैं। बड़े से बड़ी शादियों का मुकाबला करने के लिए हमारी जिंदगी पूरी तरह से तैयार। 

आईएनएस विक्रांत के सेट अप करने के लिए तैयार है। ये आईएनएस विक्रांत और उसके। फाइटर जेट खरीदे थे। भारतीय नौसेना के पास इस समय केवल छह फाइटर जेट हैं। इनका इस्तेमाल आईएनएस विक्रमादित्य के अलावा स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत से भी हो सकता है। ये तकनीक का इस्तमाल करते हैं। टेकऑफ अरेस्टर लैंडिंग रनवे छोटा होता है और उसके आखिर जंप होता है। जब फाइटर जेट आता है उसके बाद उसपर ज्यादा वो उछल जाता है और उसका वोट कर लेता है। लैंडिंग के लिए डेक पर बने हुए अरेस्टर वायर होते हैं। जिन जिन। उसे रोका जाता है तो। हो सकता है। 

विक्रांत बचानी है तो आत्मनिर्भरता ये अभी एजाज तो सिक्स परसेंट इंडीजीनस है। उसका जो स्टील है वो देश में बना हुआ है। और हमने नेशनल लीडरशिप को ये कमिटमेंट दिया है कि जसवंत तक अमृत का जब ख़तम हो जाएगा तब तक भारतीय नौसेना रेलवे हंड्रेड परसेंट आत्मनिर्भर। जमीन पर सिक्का उसी का चलता है। लहरों पर जिसकी हुकूमत होती है और भारत इस बात को बहुत अच्छे से जानता है क्योंकि भारत तीन ओर से समुद्र से घिरा हुआ है। 

इसीलिए पिछले कुछ सालों में भारतीय नौसेना को जितनी तेजी से आधुनिक बनाया गया उसकी मिसाल बहुत कम मिलती है। भारतीय नौसेना अब स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर, स्वदेशी फ्रिगेट, स्वदेशी डिस्ट्रॉयर और स्वदेशी सबमरीन के दम पर बहुत तेजी से एक वैश्विक पावर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है। 

Suraj Rai

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